
गुरसरांय। वानरा धीश शक्ति पीठ ग्राम सगौली में पागलदास महाराज के सानिध्य में विष्णु महायज्ञ एवं श्री मद भागवत कथा के पांचवें दिन नंद महोत्सव का वर्णन किया गया।
कथा व्यास भागवत भूषण आचार्य रमाकांत व्यास ने भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हुए वृन्दावन जैसा माहौल बना दिया।
उन्होंने बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि कुपात्र पर दृष्टि नहीं डालना चाहिए, क्योंकि कुपात्र पर दृष्टि डालने से दृष्टि भी दूषित हो जाती है।
भगवान ने पूतना को देखकर इसीलिए अपने नेत्र बन्द कर लिए थे,क्योंकि पूतना बाल घातिनी थी वह भगवान की दृष्टि की पात्र नहीं थी, इसलिए भगवान ने उसको देखकर अपने नेत्र बंद कर लिये।
कथा व्यास ने भक्त प्रह्लाद के बारे में बताते हुए कहा कि हिरण्यकश्यप की नगरी एरच से होली महोत्सव की शुरुआत हुई,यह भूमि धन्य है।जहां भगवान नरसिंह ने स्वयं अवतार लिया।उन्होंने एरच महोत्सव के लगातार प्रयास के लिए भक्त प्रह्लाद जन कल्याण संस्थान के अध्यक्ष अमित चौरसिया को बधाई दी।
भजनों की सुंदर प्रस्तुति पर श्रोता जमकर नाचे।
संगीतमय कथा में सह गायन हारमोनियम पर आशीष त्रिपाठी, तबला पर मनोज भण्डारया,ऑर्गन पर अनुज गोस्वामी, बेंजो पर दीपक नागर,ढोलक पर हरेंद्र,आक्टोपैड पर राधा मोहन दुवे ने संगत की।
भागवत का मूल पाठ आचार्य दुर्गेश द्विवेदी ने,तथा पूजन पं दीपक तिवारी शास्त्री ने किया।
:कथा की आरती प्रताप नायक पूर्व प्रधान एवं जयंती देवी ने की।
इस मौके पर प्रसिद्ध सितार वादक पं सरजू शरण पाठक,चंद्रभान नायक,मेजर अखिलेश पिपरैया,जगमोहन समेले, सुनीलदत्त गोस्वामी,ओमकार सिंह,ओम प्रकाश मुखिया. कमलेश नन्ना ,माधुनी शरम ,राहुल कात्त, प्रवेश, दीपू लम्बरदार ,मनीष पटसारिया, देवेंद्र बकील,प्रमोद लल्ला, रामकिशोर,सुनील नायक ,विशाल,धीरज, रामेश्वर ,कक्कू ,प्रहलाद तिवारी ,सुधीर ,लालाराम बाजपेयी, मुकेश दाऊ सगोली,निखिल नायक
कमलेश नन्ना,सुधीर नायक,भानुप्रताप,. लक्ष्मी प्रसाद,अभिषेक नायक आदि उपस्थित रहे।




