December 5, 2025 2:03 pm

गुरसराय से बी के कल्याणी दीदी ने भी चुनी अध्यात्म की राह

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गुरसराय से बी के कल्याणी दीदी ने भी चुनी अध्यात्म की राह

शिवलिंग को वरमाला पहनाकर परमात्मा शिव बाबा को अपना जीवनसाथी बनाया और आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत का संकल्प लिया। मौका था ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन में आयोजित अलौकिक दिव्य समर्पण समारोह का। इसमें देशभर से उच्च शिक्षित बीए, एमए, एमकॉम, डॉक्टरेट बेटियों ने अपने माता-पिता और परिजन के सामने संयम पथ पर चलने और ईश्वरीय सेवा का संकल्प लिया। इसका बधाई समारोह मऊरानीपुर में आयोजित किया गया। अलौकिक दिव्य समर्पण समारोह में गुरसराय से बी के कल्याणी दीदी आपने भी उच्चतम शिक्षा लेने के पश्चात अपना जीवन ईश्वरीय कार्य में समर्पित किया। इंटर मिडिएट में गुरसराय में टॉप रहीं। हर कला में निपुण एवं पारंगत है। महासमर्पण के पांच हजार से अधिक लोग साक्षी बने। इसका बधाई समारोह मऊरानीपुर में आयोजित किया गया।

इस दौरान राजयोगिनी बीके चित्रा दीदी ने कहा कि धन्य हैं वह माता-पिता जिन्होंने अपनी लाड़लियों को ईश्वरीय सेवा में अर्पित किया है। यह अपने आप में महान कार्य है। आप सभी जिस सेवाकेंद्र पर रहें, वहां खुश रहें, प्रसन्न रहें और परमात्मा का नाम रोशन करें।राजयोगिनी बीके उमा दीदी ने कहा कि आप सभी माता-पिता बहुत भाग्यशाली हैं जो भगवान को ही दामाद बना लिया। अपनी कन्या के लिए सबसे अच्छा घर और वर ढूंढा है। इन बेटियों का भी परम सौभाग्य है कि इन्होंने अपना जीवन ही परमात्मा की सेवा में लगा दिया। राजयोग बीके कविता दीदी ने कहा कि युवावस्था में संयम का मार्ग अपनाना अपने आप में प्रेरक और महान कार्य है। यह दिन इन बेटियों का सदा याद रहेगा। दिल्ली ओम शांति रिट्रीट सेंटर से आए बी के भगवान भाई ने कहा कि आज जिन कुमारियों का समर्पण हो रहा है उन्हें जन्म देकर संस्कारित करने वाले माता-पिता धन्य हैं। परम सौभाग्यशाली हैं जो अपनी बेटी को परमात्मा की सेवा में समर्पित कर रहे हैं। इन कन्याओं को इस लायक बनाया कि वह ब्रह्माकुमारी बन सकीं, इनकी टीचर्स ब्रह्माकुमारी बहनों का भी बड़ा त्याग है। इस मौके पर संचालन बीके रचना दीदी ने किया।

समर्पण में सभी बहनों को कराए यह मुख्य तीन संकल्प- पहला मैं आज से मन-वचन-कर्म से परमात्मा को अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर रही हूं। आज मैं परमात्मा शिव को साजन, पति के रूप में स्वीकार करती हूं। मैं यह निर्णय अपनी स्वेच्छा से ले रही हूं।

 

-दूसरा- मैं सदा इस ईश्वरीय यज्ञ के बनाए नियम-मर्यादा में रहकर चलूंगी, सेवा करूंगी और सदा अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिए योग-साधना को अपने जीवन का लक्ष्य बनाऊंगी।- तीसरा- इस ईश्वरीय यज्ञ, परिवार की वरिष्ठ दीदियां ईश्वरीय सेवा के लिए जहां रहने, सेवा करने के लिए कहेंगे वहां खुशी-खुशी सेवा के लिए जाने को तैयार रहूंगी। विपरीत परिस्थिति में भी खुश रहते हुए सेवा के लिए हर बात में हां, जी का पाठ पक्का करुंगी।

गुरसराय के कलाकारों ने स्वागत गीत और समर्पण गीत की शानदार प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

बुन्देलखण्ड के सुप्रसिद्ध गायक बीके रामजी भाई जी ने अपने मधुर आवाज से समारोह में समां बांधा कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक से प्रकृति संरक्षण से लेकर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाई, यातायात सुरक्षा, जल संरक्षण का संदेश दिया। देशभर की अलग-अलग संस्कृतियों की झलक से भारत देश की खूबसूरती को प्रदर्शित किया।

 

रिपोर्ट-आशुतोष गोस्वामी